नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला, जयपुर......नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला, जयपुर…… इसका निर्माण 1734 ई. में शुरू हुआ था। जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने इसे बनवाया था। नि:सन्देह यहआज इस शहर का खूबसूरत पर्यटन स्थल बन चुका है।बरसात के मौसम में इसकी सुंदरता देखने लायक होती है। इसे बनाने के पीछे राजघराने की सुरक्षा सबसे बड़ा कारण थी। एक तरफ जब मुगलकाल का पतन था और दूसरी तरफ मराठा शक्तिशाली हो रहे थे, तब इसका निर्माण कराया गया। किले तक पहुंचने के वैसे तो तीन रास्ते हैं, लेकिन आमेर महल वाला रास्ता तो जब राजपरिवार जयपुर रहने लगा, तब से इतना उपयुक्त नहीं रहा है। कनक घाटी वाला 9 किलोमीटर का रास्ता सबसे ज्यादा व्यस्त रहता है, क्योंकि वो किले को जयगढ़ से जोड़ता है। पर्यटन की दृष्टि से कार और बस से किले तक पहुंचने का आधुनिक मार्ग तो बहुत बाद में बना है। सबसे पुराना और सुरक्षित रास्ता शहर के बीच से यानी आज की पुरानी बस्ती से जाता है।

नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला, और उसका इतिहास 

नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला,पथरीली राह लेकिन इतनी खूबसूरत और सर्पीली कि किले तक पहुंचने पर ये खूबसूरत हिल स्टेशन का अहसास कराती है। इस रास्ते से ज्यादातर पैदल या दुपहिया वाहन चालक रिस्क लेकर चढ़ते रहते हैं। नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला, जयपुर…… राजाओं के जमाने में तो यहां से राजपरिवार हाथी, घोड़े और कहार पर सवार होकर जाते थे। किले के आंगन में दो और विशेषताएं हैं। पहली, यहां राजपरिवार का खजाना था, दूसरी यहां कैदियों या अपराधियों को कैद किया जाता था।
कहते हैं यहाँ शहर की प्रसिद्ध नृत्यांगना रस कपूर को भी कैद रखा गया था। साथ ही अवध के नवाब वाजिद शाह को भी इसमें शरण मिली थी। वैसे इसका मूल नाम सुदर्शनगढ़ था लेकिन बाघों के निवास कारण इसका नाम नाहरगढ़ पड़ा, लेकिन कहा यह भी जाता है कि नाहरसिंह भोमिया का मंदिर बना इसलिए भी इसका नाम नाहरगढ़ हो गया।
महाराजा सवाई राम सिंह ने भी 1868 में इसका विकास कराया और महाराजा माधोसिंह ने किले के भीतर माधवेंद्र महल बनाया था जिसमें 9 अलग-अलग भाग बने हुए हैं ,जिसमें रानियों का निवास भी रहा था। आंगन में बरसात के पानी पीने लायक बनाए रखने के लिए खूबसूरत बावडिय़ां भी बनाई गईं, जो आज भी पानी को बचाए रखने में सक्षम हैं। नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला, जयपुर……एक हिस्से में बना ऐतिहासिक पड़ाव दीपावली पर सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनता है, जहां से लोग शहर की खूबसूरती को निहारते हैं। नाहरगढ़ आज भी यह दोहराता है कि नि:संदेह मैं ऊंचा हूं और मुझ तक पहुंचना थोड़ा दूभर है, लेकिन सच में सुरक्षित हूं। हमेशा एक सुरक्षा प्रहरी की तरह शहर को सुरक्षा देता रहूंगा।
राजस्थान अपने नाम से ही वैभव और शान का प्रतीक लगता है। हो भी क्यों न इसके अलग-अलग जिलों में बने किले इसकी शान में चार चांद तो लगाते ही हैं, साथ ही इसके ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाते हैं। राजस्थानी परम्परा तथा विरासत को खुद में संजोए ये किले वास्तव में ऐतिहासिक धरोहर हैं।
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जानकारी के अनुसार राजस्थान में विचित्र किले और बावड़ी हैं जिनकी खूबसूरती की चमक दुनिया के कोने-कोने में है। ऐसा ही है नाहरगढ़ का किला जो जयपुर में अरावली की पहाड़ी पर स्थित है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ लगती है।

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